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Friday, June 26, 2009

प्रधानमंत्री पद और राजनीतिक पैंतरे

लोकसभा चुनाव के इस मौसम में लगभग आधी सीटों पर वोट डाले जा चुके हैं बाकी दो सीटों पर भी अगले दो हफ़्ते में मतदान हो जायेगा। राजनीतिक दलों के नेताओं को मालूम है कि जो स्थिति लोकसभा चुनाव 2004 के बाद थी, वही स्थिति इस बार भी है।

कुछ पार्टियों की सीटें कहीं बढ़ेंगी तो इस की जगह बढ़ेंगी। ज़ाहिर है सत्ता के लिए गठजोड़ और जोड़तोड़ बड़े पैमाने पर होगा हर पार्टी ने मिडवे अपनी राजनीति की धार दम करने के उïद्देश्य से बयानों में कुछ एडजस्टमेंट किया है। बीजेपी के अब तक के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार लालकृष्ण अडवाणी के सामने संकट के बादल घिरने लगे हैं बीजेपी ने कहना शुरू कर दिया है कि वह मोदी को भी प्रधानमंत्री बना सकती है।

आधिकारिक प्रवक्त्ता ने भी इस बात को औपचारिक ब्रीफिंग में मीडिया से बताकर आडवाणी/मोदी विवाद को शंका के दायरे से बाहर कर दिया है, क्योंकि बीजेपी के मोदी गुट को यह भरोसा है कि आडवाणी से ज्य़ादा मोदी के नाम पर वोट लिए जा सकते हैं। संभवित नतीजों के मद्देनजऱ, राष्टï्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता शरद पवार ने फिर कांग्रेस की जीत की भविष्यवाणी करना शुरु कर दिया है। इस के पहले वह नवीन पटनायक, अमर सिंह, प्रकाश कारात आदि किंग मेकर नेताओं से मेलजोल बढ़ा रहे थे कि अगर गैरकांग्रेस, गैरभाजपा प्रधानमंत्री की सरकार हुई तो उनका नाम चल जाये लेकिन दो दौर के मतदान और बाकी दौर के अनुमान ने उनकी महत्वाकांक्षा की लगाम लगाने में मदद किया है।

एक शिगुफा जो अभी कुछ दिन पहले बीजेपी नेेता लालकृण आडवाणी ने छोड़ा था वह अब माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश करात की ओर से आ रहा है। श्री करात ने कहा है कि प्रधानमंत्री ऐसा हो जो लोकसभा का सदस्य हो। अब कोई प्रकाश करात से पूछे कि इस बयान का क्या सैद्घांतिक आधार है। ज़ाहिर तौर पर यह बयान मनमोहन सिंह को रोकने के उद्देश्य से दिया गया लगता है।

मनमोहन सिंह राज्यसभा के सदस्य हैं और 16 मई के बाद भी वे लोकसभा के सदस्य नहीं बन पाएंगे क्योंकि वह चुनाव ही नहीं लड़ रहे हैं। मनमोहन सिंह को रोकने की प्रकाश करात की कोशिश इतनी मजबूत है कि वे किसी भी हद तक जा सकते हैं। यहां तक कि आडवाणी की लाइन भी ले सकते हैं। आडवाणी ने भी मनमोहन सिंह को रोकने की गरज़ से ही यह बात की थी। बयानों के इस जंगल से एक बात तो समझ में आनी शुरू हो गई है कि मनमोहन सिंह के दो सबसे बड़े शत्रु यह मानने लगे हैं कि कांग्रेस की सरकार बनने की संभावना बाकी राजनीतिक गठबंधंनों से अधिक है और मनमोहन सिंह को रोकने की पेशबंदी शुरू हो गई है।

एक दिलचस्प पहलू और विकासित हो रहा है एक बड़े अखबार के आमतौर पर भरोसेमंद संवाद्दाता ने खबर दी है कि माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी में थोड़ा विवाद है। कांग्रेस पार्टी के प्रति प्रकाश करात के रूख को पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री और पार्टी के मुखिया की मंजूरी नहीं है। अगर यह सच है तो प्रकाश करात के सामने बड़ी मुश्किल पेश आ सकती है उनकी पार्टी की ताकत तो पश्चिम बंगाल से ही आती है और वहां के तो सबसे आदरणीय नेता उनकी बात को ठीक नहीं समझ रहे हैं तो यह राजनीतिक संकट की शुरूआत का संकेत है।

वैसे भी आम राजनीतिक समझ के हिसाब से प्रकाश करात की बात अजीब लगती है। जब सैद्घांतिक रूप से उनको प्रधानमंत्री पद पर वही व्यक्ति मंजूर है, जो लोकसभा का सदस्य हो, तो साढ़े चार साल तक मनमोहन सिंह का समर्थन क्यों किया। क्या उनकी पार्टी के किसी मंच पर इस विषय पर चर्चा हुई या प्रधानमंत्री पद पर लोकसभा सदस्य को ही नियुक्त किए जाने वाला विचार उनका अपना है। या कहीं वह अपने ही किसी साथी को चेतावनी दे रहे हैं कि प्रधानमंत्री पद पर बैठने की नौबत आई तो कोई और न उम्मीदवार बन जाय।