Friday, August 12, 2011

काश हर मोहल्ले में ऐकू लाल होते



शेष नारायण सिंह

सुप्रीम कोर्ट के विचार के लिए एक अजीब मामला पेश किया गया है .अकबर नाम के एक बच्चे की कस्टडी का केस है . बच्चा मुसलमान माँ बाप का है . करीब सात साल पहले जब अकबर छः साल का था ,अपने पिता के साथ इलाहाबाद के एक शराबखाने पर गया था . बाप ने शराब पी और नशे में धुत्त हो गया . बच्चा भटक गया लेकिन बाप को पता ही नहीं चला कि बच्चा कहाँ गया . गुमशुदगी की कोई रिपोर्ट नहीं लिखाई गयी. लखनऊ के कैसर बाग़ में बच्चा चाय की एक दुकान के सामने गुमसुम हालत में पाया गया. चाय की दुकान के मालिक ऐकू लाल ने बच्चे को देखा और साथ रख लिया . बहुत कोशिश की कि बच्चे के माता पिता मिल जाएँ. मुकामी टी वी चैनलों पर इश्तिहार भी दिया लेकिन कहीं कोई नहीं मिला. जब कोई नहीं मिला जो बच्चे को अपना कह सके तो उसने बच्चे को स्कूल में दाखिल करवा दिया . बच्चे का नाम वही रखा , धर्म नहीं बदला, स्कूल में बच्चे के माता पिता का वही नाम लिखवाया जो बच्चे ने बताया था. लेकिन ऐकू ने इस बच्चे को अपने जीवन का मकसद समझ कर तय किया कि वह शादी नहीं करेगा . उसे शक़ था कि उसकी होने वाली पत्नी कहीं बच्चे का अपमान न करे . तीन साल बाद अकबर के माँ बाप को पता चला कि वह ऐकू लाल के साथ है.उन्होंने बच्चे की कस्टडी की मांग की लेकिन ऐकू लाल ने मना कर दिया क्योंकि बच्चा ही उसे छोड़कर जाने को तैयार नहीं था .बच्चे के माँ बाप ने इलाहाबाद हाई कोर्ट में मुक़दमा कर दिया और बच्चे की कस्टडी की फ़रियाद की .उन्होंने ऐकू लाल पर आरोप लगाया कि उसने बच्चे को बंधुआ मजदूर की तरह रखा हुआ था . मामला २००७ में इलाहाबाद हाई कोर्ट में जस्टिस बरकत अली जैदी की अदालत में सुनवाई के लिए आया . माननीय न्यायमूर्ति ने आदेश दिया कि बच्चे की इच्छा और केस की अजीबो गरीब हालत के मद्दे नज़र बच्चे को ऐकू लाल की कस्टडी में रखना ही ठीक होगा. बच्चे की माँ का वह तर्क भी हाई कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया कि ऐकू लाल ने बच्चे को बंधुआ मजदूर की तरह रखा था. . बच्चे के स्कूल की मार्कशीट अच्छी थी और स्कूल में उसकी पढाई अव्वल दर्जे की थी.हालात पर गौर करने के बाद जस्टिस जैदी ने कहा कि अपना देश एक धर्मनिरपेक्ष देश है . जाति बिरादरी की बातों को न्याय के रास्ते में नहीं आने देना चाहिए . जब अंतर जातीय विवाह हो सकते हैं तो अंतर जातीय या अंतर-धर्म के बाप बेटे भी हो सकते हैं . बच्चा ऐकू लाल के पास ही रहेगा ,इसमें बच्चे की इच्छा के मद्दे नज़र उसके जैविक माता पिता की प्रार्थना को नकार कर बच्चे को ऐकू लाल के पास ही रहने दिया गया .
अब मामला सुप्रीम कोर्ट में है. जहां जस्टिस डी के जैन और एच एल दत्तु की बेंच में बुधवार को इस पर विचार हुआ .अदालत ने सवाल पूछा कि जब अकबर का बाप शराब की दुकान पर बच्चे को भूलकर घर चला आया था तो बच्चे की माँ ने उसके गायब होने की रिपोर्ट क्यों नहीं लिखवाई थी. बेंच ने कहा कि सबको मालूम् है कि कानून के हिसाब से इतनी कम उम्र के बच्चे की स्वाभाविक गार्जियन उसकी माँ होती है . हम तो तुरंत आदेश देकर मामले को निपटा सकते हैं.लेकिन बच्चे की मर्ज़ी महत्वपूर्ण है . वह उस आदमी को छोड़कर नहीं जाना चाहता जिसने अब तक उसका पालन पोषण किया है . सुप्रीम कोर्ट ने बच्चे की माँ शहनाज़ के वकील से कहा कि उसकी आमदनी के बारे में एक हलफनामा दाखिल करें .लेकिन इसके पहले बेंच ने शहनाज़ के वकील से जानना चाहा कि वे क्यों ऐसा आदेश करें जिससे बच्चा उस आदमी से दूर हो जाए जिसने उसकी सात साल तक अच्छी तरह से देखभाल की है . ऐकू लाल की भावनाओं को बेंच ने नोटिस किया और कहा कि उसने बच्चे का नाम तक नहीं बदला , उसके माँ बाप का नाम वही रखा , बच्चे के माँ बाप को तलाशने के लिए विज्ञापन तक दिया.यह वही मान बाप हैं जिन्होंने अकबर के गायब होने के बाद रिपोर्ट तक नहीं लिखाया था. बहर हाल मामला देश की सर्वोच्च अदालत की नज़र में है और इस पर अगली सुनवाई के वक़्त फैसला हो पायेगा.लेकिन ऐकू लाल की तरह के लोग हे एवाह लोग हैं जिन पर हिंद को नाज़ है

वामपंथी पार्टियों का दावा,बीजेपी और कांग्रेस धन्नासेठों के हितसाधक हैं



शेष नारायण सिंह

नई दिल्ली, ११ अगस्त. लोक सभा में कम सदस्य संख्या वाली पार्टियों ने आज बीजेपी पर सीधा हमला बोला और दावा किया कि बीजेपी और कांग्रेस की मिलीभगत है . दोनों ही पार्टियों की कोशिश है कि संसद में बिना किसी चर्चा कि वे बिल पास करा लिए जाएँ जिनसे देश के आम आदमी का बहुत नुकसान होगा लेकिन बहुत बड़ी कंपनियों का फायदा होगा . राज्य सभा में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी उनकी पार्टी बीजेपी द्वारा संसद की कार्यवाही में बार बार बाधा डालने के खिलाफ है और उनकी पार्टी सहित अन्य विपक्षी दलों ने इस बात का बहुत बुरा माना है . लोकसभा में वामपंथी उअर अन्य धर्म निरपेक्ष पार्टियों के नेताओं ने एक प्रेस कानफरेंस करके विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज के उस बयान पर सख्त एतराज़ ज़ाहिर किया जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी पार्टी रोज़ सुबह तय करेगी कि उस दिन की संसद की कार्यवाही को चलने देना है कि नहीं . कम्युनिस्ट पार्टी के संसद सदस्य गुरुदास दासगुप्ता ने कहा कि यह बयान दंभ से भरा हुआ है . उन्होंने कहा कि अपने पूरे राजनीतिक जीवन में उन्होंने इतना अहंकार पूर्ण बयान कभी नहीं सुना है . गुरुदास दासगुप्ता ने दावा किया कि विपक्ष की नेता के इस बयान से उनके साथ के एन डी ए के नेता अभी आहत हैं . उन्होंने कहा कि समता पार्टी के नेता, शरद यादव ने ख़ास तौर से आग्रह किया कि प्रेस कानफरेंस में उनके दृष्टिकोण को भी रखा जाए और यह सब को बता दिया जाए कि वे सुषमा स्वराज के उस बयान को गलत मानते हैं जिसमें उन्होंने कहा है कि बीजेपी तय करेगी कि सदन कब चले और कब न चले. श्री दासगुप्त ने दावा किया कि इस मुहिम में उनके साथ बीजू जनता दल, तेलुगु देशम पार्टी , ए आई ए डी एम के, जे डी ( एस )आदि भी शामिल हैं . बीजेपी का वोट प्रतिशत २० के आस पास है लिहाजा बीजेपी को कोई हक नहीं है कि वह पूरे देश पर अपनी मर्ज़ी की बात लादे. वामपंथी पार्टियों ने दावा किया कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों ही कार्पोरेट कंपनियों के हितसाधन के लिए काम कर रही हैं . दोनों ही पार्टियां नहीं चाहतीं कि सही तरीके से बहस हो और सरकार को मंहगाई और भ्रष्टाचार के मुद्दे पर संसद में घेर जा सके. अलबता जब मामला बैंकिंग बिल और इंश्योरेंस बिल पास कराने का होगा तो दोनों ही पार्टियों की कोशिश होगी कि उसे बिना बहस के पास करा लिया जाए . उनका आरोप था कि इस मामले पर दोनों ही एक हो जायेगें .

लोकसभा में सरकार का दावा -मनरेगा लागू होने के बाद खेती की ज़मीन में वृद्धि हुई है


शेष नारायण सिंह

नई दिल्ली,११ अगस्त. ग्रामीण विकास मंत्री ,जयराम रमेश ने दावा किया है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना (मनरेगा ) के लागू होने के बाद पूरे देश में ज्यादा ज़मीन में खेती हो रही है .छोटे और मझोले किसानों की आर्थिक हालत में सुधार हुआ है . उन्होंने आज लोकसभा को बताया कि मनरेगा के अंतर्गत और भी कुछ काम लिए जाने का प्रस्ताव है . मसलन पूर्वे एराज्यों में कुछ इलाकों में कम गहराई तक बोरिंग वाले ट्यूब वेल लगाने का काम भी मनरेगा के तहत शुरू किया अजा सकता है . कांग्रेस की सांसद श्रुति चौधरी ने सरकार से मांग की कि फसल काटने के काम को भी मनरेगा के स्कोप में लिया जाया. उन्होंने बताया कि इस योजना के लागू होने के बाद पंजाब और हरयाणा में फसल काटने के लिए मजदूरों की भारी समस्या पैदा हो गयी है . अगर इस स्कीम में फसल काटने के काम को भी जोड़ दिया जाए तो किसानों को बहुत सहूलियत होगी. यह बात सच है क्योंकि पंजाब का संपन्न किसान अब कम पैसे के लिए शारीरिक श्रम नहीं करता . पंजाब में फसल काटने के लिए पिछले ३० वर्ष से यू पी और बिहार से मजदूर आते रहे हैं लेकिन जब से मनरेगा लागू हुई है तब से पूरब के मजदूर पंजाब नहीं आते . उनको अपने गाँव में ही मजदूरी का काम मिल रहा है . मंत्री ने सदन में कहा कि इस बात पर विचार किया जाएगा.बात में जनसन्देश टाइम्स से बात करते हुए जयराम रमेश ने बताया कि यह तो मनरेगा की सफलता की कसौटी है . उन्होंने बताया कि ग्रामीण रोज़गार गारंटी योजना मूल रूप से गाँव के लोगों को उनके घर के पास काम देने के उद्देश्य से बनाई गयी थी . और अगर यू पी और बिहार का मजदूर हज़ारों किलोमीटर जाकर कर मजदूरी नहीं कर रहा है तो मनरेगा को सफल माना जाना चाहिए

चर्चा के दौरान विपक्ष की नेता और बीजेपी सांसद सुषमा स्वराज ने मनरेगा पर राजनीतिक हमला बोला . उन्होंने कहा कि मनरेगा की स्कीम बहुत ही अव्यावहारिक है और पूरी तरह से असफल है . इसे ठीक से बनाया ही नहीं गया था . उन्होंने सुझाव दिया कि सभी राज्यों के संसद सदस्यों की राज्यवार बैठक बुलाकर इस पर चर्चा की जा सकती है उन्होंने दावा किया कि तीन जिलों की मनरेगा समितियों की वे अध्यक्ष हैं और उनका अनुभव है कि कहीं कुछ नहीं हो रहा है . सरकार की तरफ बताया गया कि नेता विपक्ष के राज्य ,मध्यप्रदेश में मनरेगा में बहुत सारी गड़बड़ियां हैं लेकिन उन गड़बड़ियों को ठीक करने का काम उसी कमेटी है जिसकी सुषमा जी अध्यक्ष हैं , उन्हें चाहिए कि हर तीन महीने में बैठक लें और योजना को सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करें. बाद में लोकसभा की अध्यक्ष मीरा कुमार ने कहा कि यह मामला बहुत ही गंभीर है और अगर कोई सदस्य नोटिस दे तो इस पर आधे घंटे की चर्चा की जा सकती है .

जनगणना जाति के आधार पर की जायेगी.


शेष नारायण सिंह

नई दिल्ली,११ अगस्त . लोकसभा में सदन के नेता प्रणब मुखर्जी ने कहा कि जातिवार जनगणना उसी तरीके से होगी जैसा कि सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओं की सहमति से तय किया गया था. बीजेपी की नेता सुषमा स्वराज के उस बयान के बाद कि आज सदन की कार्यवाही चलने दी जायेगी ,सबको मालूम था कि लोक सभा में आज हल्लागुल्ला नहीं होगा. लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही समता पार्टी के संसद सदस्य शरद यादव ने जातिवार जनगणना का मुद्दा उठाया . उन्होंने सरकार से जानना चाहा कि जब लोकसभा में यह तय हो चुका था कि २००१ की जनगणना जाति के आधार पर की जायगी तो सरकार उसमें परिवर्तन क्यों कर रही है . उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की कोशिश है कि वह इस गंभीर मुद्दे को हल्का कर दे. श्री यादव ने इस बात पर भी ताज्जुब जताया कि केंद्र सरकार ने आदेश दिया है कि कुछ इलाकों में राज्य सरकारें जातिवार जनगणना करेंगी. जब कि कुछ विषय नगरपालिकाओं को दे दिए गए हैं . इस मुद्दे पर बहुजन समाज पार्टी के दारा सिंह चौहान ने कहा कि अपने देश में जाति एक सच्चाई है , देश उसे जानना चाहता है , सरकार को चाहिए कि उसे सामने लाये. इस विषय पर समाजवादी पार्टी के मुलायम सिंह यादव, बीजेपी के गोपीनाथ मुंडे और डी एम के के टी आर बालू ने अपने विचार रखे . वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि सरकार ने विपक्षी पार्टियों के साथ जो फार्मूला बनाया था उसे लागू करने में कुछ दिक्क़तें आ रही हैं . लेकिन उन्होंने भरोसा जताया कि उसे ठीक कर लिया जायेगा और जनगणना बाकायदा जाति के आधार पर की जायेगी