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Wednesday, June 2, 2010
मंसूर सईद की इच्छा के मुताबिक फैज़ की जन्मशती बनायी जायेगी
नयी दिल्ली के मुक्तधारा सभागार में २ जून २०१० को मंसूर सईद को याद करने उनके साथी पंहुचे. . ६८ साल की उम्र में पिछले हफ्ते कराची में उनकी मृत्यु हो गयी थी. . वे पाकिस्तान की कम्युनिस्ट पार्टी की सेन्ट्रल कमेटी के सदस्य थे. इस मौक पर वहां मंसूर के दोस्त मौजूद थे . ५० के दशक के उनके साथी सलीम भाई भी थे तो साठ के दशक के उनके दोस्त राजेन्द्र , बबली और मधु भी थे. ज़हूर सिद्दीकी थे तो सोहेल हाशमी थे. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव , प्रकाश करात ने बताया कि जब वे दिल्ली आये थे तो आज से करीब ४२ साल पहले उन्हें मंसूर सईद की यूनिट में ही रखा गया था .. प्रकाश ने मंसूर को एक बेहतरीन इंसान के रूप में याद किया .उनके सबसे करीबी लोगों के लिए भाषण देना तो बहुत मुश्किल था लेकिन काफी कुछ यादें पब्लिक डोमेन में आयीं. उनके चचाज़ाद भाई और कामरेड ,सुहेल हाशमी ने बताया कि जब उनसे मंसूर के बारे में कुछ लिखने को कहा गया तो उन्हें कितनी परेशानी हुई . उन्होंने कहा था कि भाई मंसूर के बारे में लिखना कोई आसान काम नहीं है . यही हाल , मधु और सलीम भाई का भी था. सलीम भाई का अपने दोस्त ,मंसूर से १९५४ से साथ था , जो अब छूट गया . यादोंका सिलसिला शुरू करने के पहले सुहेल ने साफ़ कर दिया था कि मंसूर सईद की शोक सभा नहीं की जा सकती . यहाँ तो उन्हें याद करने के लिए ही लोग आये हैं . मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की पोलित ब्यूरो के सदस्य , सीताराम येचुरी ने कहा कि उनको यह बात अजीब लगी जब बताया गया कि मंसूर की उम्र ६८ साल थी. वे तो मंसूर को हमउम्र मानते थे. मंसूर की इच्छा थी कि अगले साल उर्दू के शायर फैज़ अहमद फैज़ की जन्मशती मनाई जाए .मंसूर तो चले गए लेकिन हम मनायेंगें और पाकिस्तान और भारत में इस अवसर पर कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगें .
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