जंतर-मंतर

राजनीतिक सामाजिक मुद्दों और आम आदमी की चिंताओं और सवालों को बहस की मुख्य धारा में लाने की एक कोशिश...

Thursday, September 3, 2009

दर्द पर न हों हमदर्द

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एक मशहूर फिल्मी गीत है- तुम्हीं ने दर्द दिया है, तुम्हीं दवा देना। भला जो दर्द दे रहा है, अगर उसे दवा देना है तो वह दर्द ही क्यों देगा? यह ग...
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Monday, August 31, 2009

नागपुर के चश्मा बाबा

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शुक्रवार को आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत की प्रेस कांफ्रेंस को सुनते हुए, मुझे चश्मा बाबा की बहुत याद आई। लगा कि हिंदुत्व कर राजनीति की झंडाब...
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Sunday, August 30, 2009

आडवाणी और झूठ का राजनीति शास्त्र

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बीजेपी के बड़े नेता लालकृष्ण आडवाणी को आज कल अखबारों, टीवी चैनलों में और खबरिया पोर्टलों में खूब कवरेज मिल रही है उनका एक झूठ चर्चा का विषय...

टॉप के भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रधानमंत्री

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प्रधानमंत्री डा. मनमोहन सिंह ने भ्रष्टाचार की जांच करने वाले सरकारी विभागों को हिदायत दी है कि ऊंचे पदों पर बैठे भ्रष्ट अधिकारियों और जिम्मे...
Friday, August 28, 2009

सुधरिए, वरना बाबू लोग मीडिया चलाएंगे

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यह पब्लिक है, सब जानती है : समाज के हर वर्ग की तरह मीडिया में भी गैर-जिम्मेदार लोगों का बड़े पैमाने पर प्रवेश हो चुका है। भड़ास4मीडिया से जान...
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का बरसा...जब कृषि सुखानी

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अब सरकारी तौर पर भी मान लिया गया है कि देश में सूखे की स्थिति है। कृषि मंत्रियों के सम्मेलन में केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार ने स्वीकार किय...
Wednesday, August 26, 2009

यह पब्लिक है, सब जानती है

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समाज के हर वर्ग की तरह मीडिया में भी गैर जिम्मेदार लोगों का बड़े पैमाने पर प्रवेश हो चुका है। एक किताब आई है जिसमें जिक्र है कि किस तरह से ...

न्यायपालिका की पवित्रता में इज़ाफा

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जजों की संपत्ति का मामला बहस के दायरे में आ गया है। न्यायपालिका को एक पवित्र संस्था माना जाता है। आजादी के बाद संविधान सभा की बहसों में उस...
Monday, August 24, 2009

बीजेपी के झूठ का भंडाफोड़

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बीजेपी से निकाले जाने के बाद जसवंत सिंह ने बहुत सारी ऐतिहासिक सच्चाइयों से परदा उठाया है इसका मतलब यह हुआ कि बीजेपी की शिमला चिंतन बैठक में...
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Friday, August 21, 2009

जसवंत बर्खास्त! आडवाणी क्यों नहीं?

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बीजेपी ने जसवंत सिंह को पार्टी से निकाल दिया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक किताब लिखी है जिसमें पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिनाह क...
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अकाल का खतरा और मीडिया की ज़िम्मेदारी

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देश में सूखा पड़ गया है, खेती चौपट हो चुकी है। खरीफ की फसल के लेट होने वाली बारिश से संभलने की उम्मीद दम तोड़ चुकी है। जिसके पास कुछ पैसे नौ...
Thursday, August 20, 2009

विदेश मंत्रालय की फिल्म- कोई देख नहीं सका

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कभी उर्दू की धूम सारे जहां में हुआ करती थी, दक्षिण एशिया का बेहतरीन साहित्य इसी भाषा में लिखा जाता था और उर्दू जानना पढ़े लिखे होने का सबूत ...
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शेष नारायण सिंह
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