जंतर-मंतर

राजनीतिक सामाजिक मुद्दों और आम आदमी की चिंताओं और सवालों को बहस की मुख्य धारा में लाने की एक कोशिश...

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Tuesday, January 4, 2011

फैज़ की शायरी - गुरुरे इश्क का बांकपन

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मनमोहन ( mohallalive.com से साभार ) फैज़ अहमद फैज और उनकी शायरी की जगह और उसका मूल्य ठीक-ठीक वही बता सकते हैं, जो उर्दू जुबान और अदब ...
Wednesday, July 29, 2009

ज़रदारी की पीड़ा

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जब तक बिल्ली अपने खूनी पंजों से दूसरों को लहुलहान करती रही तब तक पाकिस्तानी शासक बड़ी ही स्पष्टता से इस सच्चाई को नकारते रहे कि इस खूनी बिल्...
Sunday, July 26, 2009

इंसाफ के पक्के इंतज़ाम की जरुरत

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जूता राजनीति स्थायी भाव होता जा रहा है। अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति के ऊपर बगदाद में चला जूता एक नई राजनीति के व्याकरण को जन्म देने की क्षमता...
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शेष नारायण सिंह
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